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शुभेंदु अधिकारी की ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति से बंगाल में मचा हड़कंप: बंगाल बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ बांग्लादेशियों की जमी भारी भीड़

शुभेंदु अधिकारी की ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति से बंगाल में मचा हड़कंप: बंगाल बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ बांग्लादेशियों की जमी भारी भीड़

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय ‘अवैध घुसपैठ’ का मुद्दा सबसे गर्म है। पश्चिम बंगाल के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक कठोर फैसले ने राज्य में रह रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बीच हलचल मचा दी है। पश्चिम बंगाल के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा ‘Detect, Delete, Deport’ (पहचान करो, हटाओ और देश से निकालो) नीति की घोषणा के बाद, कानूनी कार्रवाई के डर से अवैध प्रवासियों ने खुद ही बांग्लादेश लौटना शुरू कर दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर अचानक प्रवासियों की भारी भीड़ आने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो चूका है ।

डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति: बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का सख्त आदेश

पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस विभाग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सख्त निर्देश जारी किया हैं

क्या कहता है नया नियम ?

अब यदि कोई अवैध बांग्लादेशी पकड़ा जाता है, तो उसे लंबी अदालती कार्रवाई में उलझाने के बजाय सीधे नजदीकी सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दिया जाएगा, ताकि उन्हें तुरंत वापस डिपोर्ट किया जा सके।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं, वे सीधे तौर पर घुसपैठिए माने जाएंगे। सरकार अब ऐसे लोगों का साप्ताहिक डेटा (Weekly Record) भी तैयार रखेगी।

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर पश्चिम बंगाल में पलायन की स्थिति

कार्रवाई और जेल जाने के डर से रह रहे अवैध अप्रवासी अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर सीमा की तरफ भाग रहे हैं। मंगलवार को बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिले है जिसने इंटरनेट पर भी काफी सुर्खियां बटोरी है ।

स्वरूपनगर और हकीमपुर बॉर्डर: उत्तर 24 परगना जिले के इन सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवासियों का हुजूम उमड़ रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों (BSF) की तैनाती करनी पड़ी है।

राजनीतिक समीकरण का असर: स्वरूपनगर बॉर्डर पर जुटे कुछ लोगों का कहना था, ” प्रसाशन अगर नहीं रखेगी तो क्या करेंगे बताइये और यह सरकार नहीं रखेगी तो हम रह तो नहीं सकते है तो क्या कर सकते है । ” लोगों को उम्मीद थी की बंगाल में वापस तृणमूल की सरकार आएगी लेकिन उनके उम्मीदों पर पानी फिर गया ।

मालदा में बना पश्चिम बंगाल का पहला ‘होल्डिंग सेंटर’

घुसपैठियों पर शिकंजा कसने के लिए बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में मालदा जिला के इंग्लिश बाजार (चंदन पार्क) में राज्य का पहला ‘होल्डिंग सेंटर‘ शुरू किया गया है।

कैसा है मालदा का होल्डिंग सेंटर?

सुरक्षा व्यवस्था: यह सेंटर मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरे से लैस है, जिसमें सीसीटीवी (CCTV) निगरानी, पुलिस बल, सिविल डिफेंस स्टाफ और नागरिक स्वयंसेवक तैनात हैं।

शुरुआती कार्रवाई: गज़ोल के पांडुआ इलाके से पकड़े गए 9 अवैध नागरिकों (जिनमें 3 महिलाएं और 6 नाबालिग शामिल हैं) को कड़ी सुरक्षा के बीच इस सेंटर में शिफ्ट किया जा चुका है। यहाँ उनके रहने और भोजन की पूरी व्यवस्था की गई है।

डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट


पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से ही जाली दस्तावेजों के सहारे रह रहे विदेशी नागरिकों पर नकेल कसी जा रही है। ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ की इस त्वरित कार्रवाई ने न सिर्फ घुसपैठ के नेटवर्क को तोड़ा है, बल्कि सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी पूर्ण विराम लगाने की दिशा में काम किया है।

Bikash Kumar Jha
Bikash Kumar Jha
Reporter

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