आजकल महिलाओं और खासकर यंग लड़कियों में एक समस्या बहुत तेजी से देखने को मिल रही है, वह है PCOD (Polycystic Ovarian Disease) या PCOS (Polycystic Ovarian Syndrome)। AIIMS के 2020 के डेटा के अनुसार भारत में हर 5 में से करीब 1 महिला पीसीओडी से प्रभावित है।
लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोग इसे एक लाइलाज बीमारी मान लेते हैं, जबकि यह सिर्फ एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर (जीने के तरीके से जुड़ी परेशानी) है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
PCOD या PCOS आखिर क्या है?
आसान शब्दों में कहें तो यह हमारे शरीर में हार्मोंस के असंतुलन (Hormonal Imbalance) की वजह से होता है।
जब महिलाओं की ओवरी (अंडाशय) में मेल हार्मोन (एण्ड्रोजन) का लेवल बढ़ जाता है, तो ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट (पानी की गांठें) बनने लगते हैं। इसकी वजह से ओवरी हर महीने एक हेल्दी अंडा (Egg) रिलीज नहीं कर पाती।
मुख्य लक्षण: शरीर क्या संकेत देता है?
यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को महसूस कर रही हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें:
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अनियमित पीरियड्स: पीरियड्स का मिस होना, देर से आना या बहुत कम/ज्यादा ब्लीडिंग होना।
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वजन बढ़ना: खासकर पेट के आसपास का वजन तेजी से बढ़ना और लाख कोशिशों के बाद भी कम न होना।
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चेहरे पर बाल (Hirsutism): ठुड्डी (chin), अपर लिप्स या छाती पर अनचाहे सख्त बाल आना।
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एक्ने और पिंपल्स: चेहरे और पीठ पर जिद्दी मुहांसे होना।
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बालों का झड़ना: सिर के बाल पतले होना या मेल-पैटर्न गंजापन दिखना।

क्या है इसका पक्का इलाज?
एक जरूरी बात: PCOD को किसी एक जादू की गोली से रातों-रात ठीक नहीं किया जा सकता। इसका असली इलाज आपकी किचन, रूटीन और आदतों में छिपा है।
इसे रिवर्स (ठीक) करने के 4 सबसे बड़े स्तंभ (Pillars) ये हैं:
1. खान-पान में बदलाव (Diet is Key)
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रिफाइंड कार्ब्स और चीनी को ‘बाय’ कहें: मैदा, पास्ता, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेट बंद मीठी चीजों से दूरी बनाएं। ये इंसुलिन का लेवल बढ़ाते हैं जो PCOD को बदतर करता है।
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फाइबर और प्रोटीन बढ़ाएं: अपनी थाली में हरी सब्जियां, दालें, स्प्राउट्स, नट्स और फल शामिल करें।
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लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) फूड्स: ओट्स, ब्राउन राइस, और मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) खाएं।

2. एक्टिव लाइफस्टाइल (Daily Exercise)
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हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Weight training) और कार्डियो का कॉम्बिनेशन इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है।
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अगर जिम नहीं जाना, तो तेज वॉक (Brisk Walk), योग या साइकलिंग से शुरुआत करें।

3. तनाव कम करें और भरपूर सोएं
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क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव) कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो PCOD के लक्षणों को और बढ़ा देता है। ध्यान (Meditation) या गहरी सांस लेने की आदत डालें।
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हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। सोते समय आपका शरीर हार्मोन्स को खुद बैलेंस करता है।

4. डॉक्टर की सलाह और मेडिकल ट्रीटमेंट
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अगर लाइफस्टाइल बदलने के बाद भी आराम न मिले, तो किसी अच्छी Gynecologist या Endocrinologist से मिलें।
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डॉक्टर लक्षणों के आधार पर इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने की दवाएं (जैसे Metformin) या पीरियड्स रेगुलर करने की दवाएं दे सकते हैं।
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