Roti गिनकर बनाने की आदत अगर आपके अंदर है तो यह वास्तु शास्त्र के अनुसार आपकी यह आदत गलत है। क्यूंकि Roti गिनकर बनाने से घर की सुख समृद्धि को सिमित कर देती है।
भारतीय समाज में रसोई न की सिर्फ खाना बनाने की एक जगह है बल्कि घर की खुशहाली और बरकत की एक जगह भी है । लोग इसको पुरानी कथा या फिर अन्धविश्वास कह कर लोग टाल देते है लेकिन इससे स्वास्थ से जुड़ा एक तथ्य भी है आइये हम इस खबर को पुरे डिटेल्स में जानते है
पारंपरिक हिंदू परिवारों में भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए (गौ ग्रास) और अंतिम Roti कुत्ते या अन्य जीवों के लिए निकालने का नियम है। Roti गिनकर बनाने से जीव-जंतुओं के प्रति दया और दान की यह सुंदर परंपरा प्रभावित होती है।
मनुष्य के अंदर भूख की अनिश्चितता
मनुष्य की भूख हर दिन एक जैसी नहीं होती। किसी दिन काम के तनाव, थकान या शारीरिक गतिविधि के कारण व्यक्ति को अधिक भूख लग सकती है, तो किसी दिन कम।
जब कोई व्यक्ति भोजन करने बैठता है और उसे पता हो कि रोटियां सीमित (Limited) हैं, तो वह खुलकर भोजन का आनंद नहीं ले पाता। गिनकर बनाई गई Roti खाने वाले के मन में एक अनजाना संकोच पैदा करती हैं, जो पाचन क्रिया पर भी नकारात्मक असर डालता है।

क्या है धार्मिक मान्यता ?
ज्योतिष और शास्त्रों में भोजन को सीधा संबंध ग्रहों और देवी-देवताओं से जोड़ा गया है।
मां अन्नपूर्णा का अपमान: मान्यता है कि भोजन को गिनकर या नापकर बनाना मां अन्नपूर्णा के प्रति कंजूसी दिखाने जैसा है। इससे घर में बरकत कम होती है।
ग्रहों का प्रभाव: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रसोई घर पर मंगल और सूर्य का प्रभाव होता है। भोजन को लेकर अत्यधिक कंजूसी या हिसाब-किताब रखने से कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे परिवार में कलह बढ़ सकती है।
“Roti गिनकर न बनाना” हमें उदारता, अतिथि सत्कार और मानसिक शांति सिखाता है। इसका उद्देश्य भोजन की बर्बादी करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि घर का कोई भी सदस्य या द्वार पर आया कोई अतिथि भूखा न रहे।
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