मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन भारत की घेराबंदी करने के लिए जल्द ही बांग्लादेश को J-10CE लड़ाकू विमान देने वाला है। दोनों देशों में 2.2 अरब डॉलर की यह डील जल्द ही चीन और बांग्लादेश के बीच फाइनल हो सकती है। चीन बांग्लादेश के बीच चल रहे डील में लड़ाकू विमान, लॉजिस्टिक, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और लंबे समय तक मेंटेनेंस सपोर्ट जैसी सुविधाएं भी शामिल है। लेकिन इस डील से भारत की टेंशन थोड़ी बढ़ सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के सैन्य विशेषज्ञ इसे चीन की सैन्य घेराबंदी के रूप में देख रहे है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बड़े नज़रिए से देख रहे हैं। J-10CE वही फाइटर जेट है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ युद्ध में किया था।आपको बता दें, पाकिस्तान और चीन दावा करते हैं कि J-10CE लड़ाकू विमान ने भारत के राफेल को मात दी थी।
आखिर क्या है इस चीन बांग्लादेश डील में ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस डील की अनुमानित लागत 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर है। इस सौदे बांग्लादेश को लड़ाकू विमान, लॉजिस्टिक, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और लंबे समय तक मेंटेनेंस सपोर्ट दिया जायेगा। इससे हमारे पडोसी देश बांग्लादेश की वायु सेना की युद्ध क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही भारत के लिए चिंता का विषय भी बनेगी क्यूंकि भारत के संवेदनशील पूर्वी सीमा के ठीक पास चीन की रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी भी बढ़ेगी। आपको बता दें अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद सत्ता में आये मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीन के साथ अपना सम्बन्ध काफी बेहतर करने पर जोर देते हुए यह डील की थी। यह राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय अनिश्चितता के दौर में बांग्लादेश की बाहरी सुरक्षा प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव का संकेत के रूप में देखा जा है।

10 साल में पूरा भुगतान करेगा बांग्लादेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश इस डील के रकम को चुकाने के लिए 10 वर्ष का समय लेगा जिसके अंदर बांग्लादेश अनुमानित 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम चुकाएगा । रिपोर्ट्स के अनुसार चीन वर्ष 2026 – 2027 में विमानों की डिलीवरी करेगा । भारतीय सैन्य और कूटनीतिक विषेशज्ञों का इस सौदे पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि J-10CE एक फाइटर जेट तो है. लेकिन यह 4.5-जेनरेशन फाइटर प्लेटफॉर्म है। यह एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार, आधुनिक डेटा लिंक, बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल इंटीग्रेशन और नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट जैसी क्षमता से काफी लैस है।

इस डील से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
भारत के लिए, बांग्लादेश की उस चीनी फाइटर इकोसिस्टम में दिलचस्पी, जिसे पाकिस्तान पहले से ही इस्तेमाल कर रहा है, उन पुरानी चिंताओं को और बढ़ाती है कि चीन के नेतृत्व में भारतीय मुख्य भूमि के चारों ओर एक क्षेत्रीय सैन्य ढांचा मज़बूत कर रहा है। भारत की रणनीतिक चिंता इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि बांग्लादेश भौगोलिक रूप से बहुत संवेदनशील स्थिति में है जहाँ शेख हसीना के जाने के बाद रिश्ते अब सामन्य नहीं दिख रहे है। और बांग्लादेश की सीमा सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है, जिसे आम तौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है और जो एक संकरे ज़मीनी रास्ते से भारत की मुख्य भूमि को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।