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असम के 126 विधानसभा सीटों पर कल होगा निर्णायक मतदान |


कल असम में 126 सीटों पर विधानसभा मतदान होने जा रहा है | वही जहाँ भाजपा विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने का उम्मीद में बैठी है वही दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन उन्हें सत्ता से हटाने का दावा कर रही है | चुनाव प्रचार ख़तम हो चूका है EVM मशीन निर्धारित जगह पर पहुँच चुकी है |


अब देखना यह काफी अहम् हो गया है की कौन किसपर भारी पड़ेगा क्या है असम का चुनावी गणित |
आपको बता दें की 2023 में हुए परिसीमन के बाद यह पहला चुनाव होने वाला है |


सत्ता के दावेदारों में चाय बागान मजदूरों और महिला वोटरों को लुभाने की होड़ काफी प्रचार में देखने को मिली | बागान में काम करने वाले मजदूर कम से कम 36 सीटों पर अपनी अहम् भूमिका निभाने वाले है |

2023 में हुए परिसीमन के कारण राज्य में मुस्लिम आबादी वाले सीटों की संख्या 29 से घट कर 22 रह गई है. अर्थात वैसी 7 सीटें घट गई हैं जहां अब बांग्लादेश से आने वाले मुसलमान निर्णायक स्थिति में हो सकते थे |

आपको पिछले विधानसभा के आंकड़े बताते चले तो वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को 75 और कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें ही मिली सकी थी | तब बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) भी कांग्रेस गठबंधन में शामिल थी. लेकिन इस बार वह अलग चुनाव लड़ रही है

असम में चुनाव के मुद्दे और ध्रुवीकरण


भाजपा इस बार ध्रुवीकरण के सहारे मैदान में उत्तरी है |असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा लंबे समय से ‘मियां’ मुसलमानों के खिलाफ मुखर रहे हैं आपको बता दे असम में दो मुस्लिम समुदाय है एक मिया मुस्लिम और एक खिलॉन्जिया मुस्लिम |

माना जाता है मिया मुस्लिम वो है जो बांग्लादेश से भारत आये थे और खिलॉन्जिया मुस्लिम वो है जो Indigenous Muslims है अर्थात जो असम के रहने वाले सरकार से मान्यता प्राप्त है जो Indigenous Muslims की श्रेणी में आते है | इसी वजह से राज्य में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण तेज हुआ है. दूसरी ओर, कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ सत्तारूढ़ पार्टी के आक्रामक बयानों के अलावा मुख्यमंत्री के कथित भ्रष्टाचार को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर चुनावी मैदान में उतरे |

इस बार ऐसा माना जा रहा था की विपक्ष की कड़ी चुनौतियों का सामना शायद भाजपा को नहीं करना पड़ेगा लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आया तस्वीरें बदलती गई ।


लंबे समय से चल रहे कयासों के बाद कांग्रेस ने राइजोर दल के साथ हाथ मिलाया साथ ही विपक्षी गटबंधन में इन दोनों के सिवा असम जातीय परिषद और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस जैसे राजनीतिक दल भी साथ दिखे ।


इनके सीट बटवारों के फार्मूले के तहत कांग्रेस 101 राइजोर दल और CPM 11 , जातीय परिषद को 10 और हिल लीडर्स कांफ्रेंस दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है । भाजपा अपना जीत का दावा करते हुए मैदान में उतरी है एनडीए में भाजपा 89 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं असम गण परिषद 25 सीट और बोडो पिपुल्स फ्रंट 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे है आपको बता दे की NDA की सहयोगी यूनाइटेड पिपुल्स पार्टी लिबरल इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ रही है ।


upper assam सबसे महत्वपूर्ण जगह माना जाता है ऐसा कहा जाता है की गुवाहाटी की ताजपोशी उन्ही पचास सीटों पर तय होती है ।

महिला और जेन जी तय करेंगे असम का अगला मुख्यमंत्री कौन ?

बीजेपी सरकार की उम्मीद महिला वोटर्स से जुड़ी है चुनाव से ठीक पहले असम सरकार ने अरुणोदय योजना के तहत राज्य के 40 लाख महिलाओं के खाते में 3,600 करोड़ रुपए का सौगात भेजा था आपको बता दे असम में पुरुष और महिला वोटर के आंकड़े समान है कई सीटों पर महिला के वोट काफ़ी निर्णायक है

इसी प्रकार जेन जी वोटर इस बार किसे वोट करेंगे ये भी काफ़ी अहम है क्यूंकि चुनाव आयोग का अगर हम आंकड़ा देखें तो राज्य के लगभग ढाई करोड़ वोटरों में 29 फीसदी यानी 73 लाख से ज़्यादा वोटर 19 से 29 साल के श्रेणी में आते है । अब सुबह मतदान होने वाला है असम की जानता अपना भाग्य ख़ुद तय करेंगे अपने मतदान के साथ ।

असम
@ECI

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