पेट्रोल डीज़ल के दाम लगातार बढ़ने से लोगों की जेब पर महंगाई की मार रुक नहीं रही है। घरेलू सामान की आसमान छूती कीमतों के बीच अब पेट्रोल डीज़ल के बढ़ते दामों ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल डीज़ल की कीमतों में इजाफा किया गया, जो पिछले 11 दिनों के भीतर चौथी बड़ी बढ़ोतरी है।

अब भी कंपनियों का घाटा बरकरार, 20 रुपये और बढ़ाने की जरूरत?
भले ही पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹7 प्रति लीटर से ज्यादा की उछाल हो चुकी है, लेकिन अब भी देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां अर्थात IOC, BPCL और HPC अब भी घाटे के मार से जूझ रही हैं।
कच्चे तेल को खरीदने, उसे रिफाइन करने और बाजार में बेचने की लागत के बीच का अंतर इतना ज्यादा है कि पुराना घाटा पूरा करने के लिए कीमतों में सैद्धांतिक रूप से ₹28 से ₹33 प्रति लीटर की बढ़ोतरी जरूरी है। यानी मौजूदा बढ़ोतरी के बाद भी कंपनियों का नुकसान से उभरने के लिए पेट्रोल-डीजल को कम से कम ₹20 और महंगा करना होगा। हालांकि, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एक साथ इतनी बड़ी बढ़ोतरी संभव नहीं है, इसलिए आने वाले समय में किस्तों में दाम बढ़ना तय माना जा रहा है।

74 दिनों की सख्ती के बाद और ₹1.2 लाख करोड़ का भारी नुकसान
28 फरवरी से शुरू हुए ईरान संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। इसके बावजूद, भारत में करीब 74 दिनों तक ईंधन की कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा गया था।
कंपनियां विदेशी बाजार से महंगे दामों पर क्रूड अर्थात कच्चा तेल खरीदकर घरेलू बाजार में पुराने रेट पर बेच रही थीं लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही जब कीमतों पर से रोक हटी, तब तक तेल कंपनियों का कुल घाटा ₹1.2 लाख करोड़ के पार जा चुका था। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है।

हर दिन होता था ₹1,600 करोड़ का घाटा, अब मिली मामूली राहत
जब कच्चे तेल की कीमतें अपने चरम पर थीं, तब भारतीय तेल कंपनियों को हर दिन करीब ₹1,600 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था। हाल ही में हुए मूल्य की वृद्धि से कंपनियों के दैनिक घाटे में कुछ कमी आई है।
इस बीच वैश्विक बाजार से थोड़ी राहत की खबर भी आई है। ईरान और अमेरिका के बीच राजनयिक बातचीत की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5% की गिरावट सामने आया है। इससे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे मुख्य तेल मार्गों में संकट का डर कम हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञ का यह भी कहना है कि सप्लाई चेन और शिपिंग रूट को सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा, जिससे निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम ऊंचे ही बने रह सकते हैं।

सरकार के सामने दोहरी मुसीबत
मौजूदा स्थति को देखते हुए केंद्र सरकार के सामने एक तरफ आम जनता को महंगाई से बचाने की चुनौती है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई बढ़ती है और सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत को बचाना भी जरूरी है, क्योंकि वे लंबे समय तक इस भारी घाटे को सहन नहीं कर सकतीं। फिलहाल ₹7.38 तक की कुल बढ़ोतरी के बाद भी राहत के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।

जानिए पिछले 11 दिनों में कब-कब और कितने पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़े :
तारीख पेट्रोल में बढ़ोतरी डीजल में बढ़ोतरी
15 मई ₹3.29 प्रति लीटर ₹3.11 प्रति लीटर
19 मई ₹0.96 प्रति लीटर ₹0.94 प्रति लीटर
23 मई ₹0.94 प्रति लीटर ₹0.95 प्रति लीटर
25 मई ₹2.87 प्रति लीटर ₹2.80 प्रति लीटर