पटना में 15 किलो सोने की ‘फिल्मी’ लूट का पर्दाफाश , डेढ़ साल से की रेकी फिर दिया कस्टम अफसर बनकर घटना को अंजाम

बिहार के राजधानी पटना में 15 किलो सोने की लूट फ़िल्मी अंदाज़ में किया गया। आपको बता दे चोरों ने चोरी से पहले डेढ़ साल तक रेकी करने के बाद इस घटना को अंजाम दिया । बदमाशों ने 18 महीने तक व्यापारी के हर चाल पर नज़र रखा और फिर नकली कस्टम के अधिकारी बनकर वारदात को अंजाम दिया । इस लूट ने बिहार के पुलिस डिपार्टमेंट में हड़कंप मचा दिया और साथ ही व्यापारी जगत में देहशत भी फैला दिया । बिहार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत एक्शन लिया और तीन मुख्य आरोपी को धर दबोचा ।
क्या है इस वारदात की पृष्टभूमि ?

घटना 4 अप्रैल 2026 की है जब एक सोना व्यापारी दानापुर रेलवे स्टेशन पर उतरकर ऑटो से अपने निर्धारित जगह पर जा रहा था । उसके पास लगभग 14 किलो 900 ग्राम सोना उस वक़्त उसके साथ मौजूद था। जैसे ही टेंपो खगौल थाना क्षेत्र के पास पहुंचा तभी एक सफेद रंग की लग्जरी कार ने फिल्मी स्टाइल में टेंपो का रास्ता रोका। कुछ युवक कार से उतरे और खुदको ‘कस्टम विभाग’ का अधिकारी बताया।
उन्होंने पुरे जोश के साथ व्यापारी को धमकाया और कहा कि उसके पास मौजूद सोना अवैध है और उसे जांच के लिए ‘मुख्यालय’ उनके साथ जाना होगा। व्यापारी उनकी वर्दी और रसूख को देखकर डर गया और चुपचाप उनकी कार में बैठने को मजबूर हो गया। कार के अंदर बैठते ही लुटेरों का असली चेहरा सामने आ गया। उन्होंने हथियार के बल पर व्यापारी को बंधक बना लिया, सारा सोना लूट लिया और उसे एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए।
डेढ़ साल की ‘तपस्या’: रेकी का खौफनाक जाल
पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में जब SIT और एसटीएफ STF ने जांच शुरू की, तो जो सबूत सामने आए वे चौंकाने वाले थे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने इस एक वारदात को अंजाम देने के लिए पिछले डेढ़ साल से रेकी की थी।

लुटेरों को व्यापारी के आने-जाने के हर समय पता था साथ ही उसके रूट और उसके पास मौजूद सोने की मात्रा की जानकारी भी सटीक थी। वे जानते थे कि व्यापारी कब स्टेशन पहुंचता है और किस गाड़ी का इस्तेमाल करता है। इस लंबी प्लानिंग से यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने केवल लूट नहीं की, बल्कि एक व्यवस्थित रूप से पूरा ‘ऑपरेशन’ चलाया था। वारदात में इस्तेमाल होने वाली कार भी चोरी की थी, जिसे खासतौर पर इस लूट के लिए तैयार किया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई: सर्विलांस और तकनीकी जाल
वारदात के तुरंत बाद पटना पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी की फुटेज खंगाली और संदिग्ध मोबाइल टावरों के डंप डेटा का विश्लेषण किया। जांच और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अमरनाथ उर्फ गोपी, आदित्य गिरी और संजय कुमार के रूप की गयी है।
पकड़े गए ये तीनों आरोपी पटना सिटी के मेहंदीगंज और बाईपास इलाकों के रहने वाले हैं। पटना पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इनका पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है और ये पहले भी जेल जा चुके हैं। गिरफ्तारी के दौरान इनके पास से 5 किलो 400 ग्राम सोना और 1 लाख 97 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
गिरोह का नेटवर्क अभी भी चल रहे है फरार
SSP ने खुलासा किया कि इस पूरी वारदात में कुल 9 अपराधी शामिल थे। फिलहाल 3 पुलिस की हिरासत में हैं, जबकि बाकी 6 सदस्य अभी भी फरार चल रहे हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के बाकी सदस्यों के पास भी लूटे गए सोने का हिस्सा है। पुलिस की अलग-अलग टीमें पटना और आसपास के जिलों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।











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