आपको बता दें 22 तारीख को FCRA Rule में गृह मंत्रालय द्वारा नये बदलाव किये गए थे।गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों में सख्त संशोधन किए हैं। नए संशोधनों के तहत एनजीओ और संस्थाओं को विदेशी चंदा प्राप्त करने और खर्च करने के लिए अधिक विस्तृत वित्तीय खुलासे, सोशल मीडिया की जानकारी, और गतिविधियों के अनुसार अलग-अलग लाइसेंस शुल्क देने होंगे।
गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृति क गतिविधियों के लिए विदेश से मिलने या कहे आने वाले फंड की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगी । सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्द्देय विदेशी धन के उपयोग को अधिक पारदर्शी , जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है, ताकि उसका इस्तेमाल केवल घोषित और वैध उद्देश्द्देयों के लिए सिर्फ हो सके ।
लेकिन अब इस मामले में राजनितिक मोड़ लेती दिख रही है आज इस मुद्दे को लेकर लोकसभा संसद और कांग्रेस पार्टी के जनरल सेक्रेट्री के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखा है ।
FCRA मुद्दे पर के.सी. वेणुगोपाल ने क्या कहा
के.सी. वेणुगोपाल ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ” हमने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर FCRA नियमों में हाल ही में किए गए बदलावों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। ये बदलाव सिविल सोसाइटी संगठनों, खासकर अल्पसंख्यक संस्थानों द्वारा चलाए जा रहे संगठनों की आज़ादी को बुरी तरह प्रभावित करते हैं और उनके कामकाज में बाधा डालते हैं।


मार्च 2026 में लोकसभा में FCRA में संशोधन लाने की नाकाम कोशिश के बाद, सरकार एक बार फिर ऐसे बदलाव लाने की कोशिश कर रही है जिनसे उसे उन संस्थानों की संपत्ति ज़ब्त करने का अधिकार मिल जाएगा जिनके लाइसेंस रद्द हो गए हैं या जिनकी समय-सीमा खत्म हो गई है।
और भी हैरानी की बात यह है कि जो चीज़ पहले संसद में कानून के तौर पर लाई गई थी, उसे अब नियमों के ज़रिए ‘पिछले दरवाज़े’ से लाया जा रहा है – यानी यह पूरी तरह से सरकार का एकतरफ़ा आदेश है।
कड़े आर्थिक दंड लगाकर सरकार का मकसद छोटे NGO को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना है, और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देने की शर्त असल में धीरे-धीरे निगरानी बढ़ाने का ही एक तरीका है।
हम इस कठोर कदम को पूरी तरह से खारिज करते हैं और सरकार को सिविल सोसाइटी समूहों और अल्पसंख्यक संस्थानों को बिना किसी डर या धमकी के काम करने देना चाहिए।”
Wrote to PM Modi demanding the immediate withdrawal of the latest amendments to the FCRA Rules. These amendments severely cripple the autonomy and hamper the regular functioning of civil society organisations, especially those run by minority institutions.
Once more, after the… pic.twitter.com/n2X8qzlOZN
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) June 25, 2026
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