बांग्लादेश ‘Mecca Pact’ में शामिल होने के लिए बेताब है, लेकिन भारत की वजह से उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है। इसी बीच, बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने इस समझौते को लेकर भारत पर तीखा हमला बोला है। आपको बता दें कि ‘मक्का पैक्ट’ मुख्य रूप से पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ एक रणनीतिक रक्षा समझौता है।
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (JeI) के प्रमुख शफीकुर रहमान ने देश के ‘Mecca Pact’ में शामिल न होने पर भारत पर कटाक्ष किया है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने बांग्लादेश को इस संयुक्त रक्षा समझौते (Joint Defense Agreement) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेशी सरकार अपनी भौगोलिक स्थिति और भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इससे दूरी बनाए हुए है। इसके बावजूद, देश के कट्टरपंथी और पाकिस्तान समर्थक गुट लगातार सरकार पर इस पैक्ट का हिस्सा बनने का दबाव बना रहे हैं।

शफीकुर रहमान ने क्या कहा?
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘Mecca Pact’ में शामिल होना पूरी तरह से बांग्लादेश का आंतरिक मामला है। यदि बांग्लादेश अपने देश और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर कोई फैसला करता है, तो इसमें किसी अन्य को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि शफीकुर रहमान ने अपने बयान में सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका साफ इशारा भारत की ओर ही था। इसकी मुख्य वजह जमात का पुराना भारत-विरोधी रुख है, जिसने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय भी पाकिस्तान का समर्थन किया था।
Joining the Makkah Pact is an entirely sovereign and internal matter for Bangladesh. If Bangladesh takes any decision considering the needs and interests of the country and its people, there is no reason for anyone else to feel disturbed or distressed by it.
— Dr. Shafiqur Rahman (@Drsr_Official) August 27, 2026
बांग्लादेश ने Mecca Pact में दिलचस्पी क्यों दिखाई ?
बांग्लादेश सरकार ने Mecca Pact में शामिल होने को लेकर अपनी रुचि खुलकर सामने रखी है। पीएम तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार और विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर का कहना है कि दुनिया भर के इस्लामिक देश और पश्चिम एशिया के सहयोगी बांग्लादेश के नेतृत्व को अपने साथ आने का बुलावा दे रहे हैं। ऐसे में, यदि इस्लामी देशों के बीच किसी सुरक्षा समझौते का हिस्सा बना जाता है, तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

आखिर क्या है ‘Mecca Pact’?
‘Mecca Pact’ मुख्य रूप से पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ एक रणनीतिक सुरक्षा समझौता है, जिसे ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ भी कहा जाता है। इस पैक्ट को मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में चल रहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के तनाव/संघर्ष के बीच अमल में लाया गया है। इसकी कार्यशैली और प्रकृति को देखते हुए इसकी तुलना ‘नाटो’ (NATO) से की जा रही है, जिसके चलते इसे ‘इस्लामिक नाटो’ या ‘मुस्लिम नाटो’ भी कहा जाने लगा है। इस समझौते का सबसे अहम नियम यह है कि इसके किसी भी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे सभी सदस्य देशों पर हुआ आक्रमण माना जाएगा।